हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर नामजद अब्दुल मलिक की जमानत अर्जी पर बुधवार को अहम घटनाक्रम सामने आया। नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इंकार करते हुए स्वयं को मामले से अलग कर लिया। अब यह प्रकरण नई डिवीजन बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा, जिसका गठन मुख्य न्यायाधीश करेंगे।

इस मामले में पहले से सुनवाई जारी थी और अदालत पूर्व में कई सह-अभियुक्तों को जमानत दे चुकी है। इनमें मोकिन सैफी, जियाउर रहमान और रईस अहमद सहित अन्य आरोपी शामिल हैं। हालांकि पुलिस द्वारा मुख्य साजिशकर्ता बताए गए अब्दुल मलिक को अब तक राहत नहीं मिल सकी है।

पिछली सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया था कि घटना के दिन उनका मुवक्किल मौके पर मौजूद नहीं था। वकीलों का कहना था कि प्रारंभिक एफआईआर में भी उसका नाम दर्ज नहीं था और बाद में जांच के आधार पर उसे जोड़ा गया। उन्होंने यह भी दलील दी कि जब अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, तो समान आधार पर मलिक को भी जमानत दी जानी चाहिए।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार बनभूलपुरा उपद्रव के संबंध में अब्दुल मलिक समेत अन्य के खिलाफ चार अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं। इनमें राजकीय नजूल भूमि पर कथित अवैध कब्जा, फर्जी शपथपत्र के आधार पर प्लॉटिंग और निर्माण कराने जैसे आरोप शामिल हैं। प्रशासन जब अतिक्रमण हटाने पहुंचा, तब स्थिति बिगड़ने और हिंसा भड़कने की बात कही गई है।
गौरतलब है कि 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हिंसा फैल गई थी। इस दौरान पथराव और आगजनी की घटनाएं हुईं, जिसमें पुलिसकर्मी और अन्य लोग घायल हुए, जबकि कुछ लोगों की मौत भी हुई। घटना के बाद इलाके में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए थे।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई गठित डिवीजन बेंच अब्दुल मलिक की जमानत याचिका पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल मुख्य आरोपी की राहत पर संशय बरकरार है।




