Dehradun Big Breaking: सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में करोड़ों की स्टाम्प चोरी का खुलासा, डीएम का बड़ा एक्शन

January 28, 2026 5:59 PM


देहरादून डीएम सविन बंसल ने ऋषिकेश सब-रजिस्ट्रार कार्यालय पर अचानक छापा मारा, जहां गंभीर भ्रष्टाचार उजागर हुआ। मौके पर सब-रजिस्ट्रार नदारद थे और एक लिपिक अवैध रूप से रजिस्ट्री करते पकड़ा गया। निरीक्षण में एक ‘घोस्ट कर्मचारी’ और स्टाम्प चोरी का बड़ा मामला भी सामने आया है।

Dehradun Big Breaking : देहरादून जिलाधिकारी सविन बंसल ने मंगलवार (28 जनवरी) को ऋषिकेश स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय का औचक निरीक्षण किया तो वहां हड़कंप मच गया। दफ्तर के हालात देखकर डीएम का पारा चढ़ गया।

निरीक्षण में पाया गया कि सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में मौजूद ही नहीं थे, उनकी जगह एक निबंधन लिपिक (Clerk) गैर-कानूनी तरीके से जमीनों की रजिस्ट्री कर रहा था।

डीएम ने मौके पर ही लिपिक से सवाल किया, “आपको संपत्ति मूल्यांकन (47-A) का कोई ज्ञान नहीं है, तो आपने स्टाम्प शुल्क कैसे तय कर दिया? आपको यह अधिकार किसने दिया?” इस सवाल पर लिपिक कोई जवाब नहीं दे सका। डीएम ने इसे आपराधिक कृत्य मानते हुए सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

औद्योगिक भूखंडों में खेल और स्टाम्प चोरी

निरीक्षण के दौरान करोड़ों रुपये की स्टाम्प चोरी का मामला भी पकड़ में आया। जांच में पता चला कि औद्योगिक क्षेत्रों की जमीनों को आवासीय दरों पर छोटे-छोटे टुकड़ों में बेचकर रजिस्ट्री की जा रही थी। डीएम ने इसे राजस्व की गंभीर हानि माना है।

जब वहां मौजूद कर्मचारियों से औद्योगिक क्षेत्र के खसरा नंबर और सूची मांगी गई, तो वे कोई जवाब नहीं दे पाए। इस गड़बड़ी की तह तक जाने के लिए प्रशासन ने विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

दफ्तर में मिला ‘घोस्ट कर्मचारी’

कार्यालय में एक ऐसा कर्मचारी काम करता मिला, जिसका रिकॉर्ड में कोई नामोनिशान नहीं था। न उसके पास नियुक्ति पत्र था और न ही उपस्थिति पंजिका (Attendance Register) में उसका नाम था। डीएम ने इसे ‘घोस्ट कार्मिक’ बताते हुए तुरंत सभी कर्मचारियों का रिकॉर्ड तलब कर लिया।

इसके अलावा, ऑफिस खुलने का समय सुबह 9:30 बजे है, लेकिन पहली रजिस्ट्री 11:15 बजे शुरू की गई। देरी का कारण पूछने पर स्टाफ खामोश रहा।

धूल फांक रही थीं लोगों की फाइलें

वहां मौजूद फरियादियों ने डीएम को बताया कि वे रजिस्ट्री की नकल और मूल दस्तावेज लेने के लिए महीनों से परेशान हो रहे हैं। नियम के मुताबिक मूल दस्तावेज रजिस्ट्री के 3 दिन के भीतर और अर्जेंट नकल 24 घंटे में मिलनी चाहिए।

हकीकत यह थी कि सैकड़ों मूल विलेख अलमारी में धूल खा रहे थे और लोग सालों से चक्कर लगा रहे थे। डीएम ने मौके पर ही कंप्यूटर और पेंडिंग फाइलें जब्त कर तहसील प्रशासन के सुपुर्द कर दीं। डीएम सविन बंसल ने स्पष्ट किया कि जनता से जुड़े कार्यों में लापरवाही और नियमों की अनदेखी पर अब सीधे एफआईआर और कड़ी कार्रवाई होगी।

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