राज्य सरकार फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड प्राकृतिक सौंदर्य, विविध भौगोलिक परिस्थितियों, सांस्कृतिक विरासत और शांत वातावरण के कारण फिल्म निर्माण के लिए आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में लागू उत्तराखण्ड फिल्म नीति-2024 का सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है। सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से शूटिंग अनुमति प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है, जिससे फिल्म निर्माताओं को त्वरित स्वीकृति मिल रही है। सरकार का उद्देश्य केवल शूटिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन, स्थानीय रोजगार, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती देना है।
2025-26 में 25 फिल्मों को मिला अनुदान
उत्तराखण्ड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी ने जानकारी दी कि परिषद द्वारा वर्ष में दो बार (जुलाई और जनवरी) अनुदान हेतु समिति की बैठक आयोजित की जाती है।
- जुलाई 2025 की बैठक में 12 फिल्मों को अनुदान स्वीकृत किया गया।
- जनवरी 2026 की बैठक में 13 फिल्मों को अनुदान दिया गया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 25 फिल्मों को 8.28 करोड़ रुपये की अनुदान राशि जारी की गई।
क्षेत्रीय सिनेमा को बढ़ावा
फिल्म नीति-2024 के तहत इस वर्ष 14 गढ़वाली, कुमाऊंनी एवं जौनसारी फिल्मों को अनुदान मिला। इनमें प्रमुख फिल्में शामिल हैं:
जोना, ‘मीठी माँ कु आशीर्वाद’, मेरे गांव की बाट, घपरोल, द्वी होला जब साथ, गढ़-कुमौं, असग़ार, रतब्याण, संस्कार, मेरु गौ, अजाण, बथों सुबेरो घाम-2, धरती म्यर कुमाऊँ, कारा एक प्रथा।
हिन्दी/अंग्रेजी फिल्मों को भी सहयोग
इस वित्तीय वर्ष में 11 हिन्दी/अंग्रेजी फिल्मों और वेब सीरीज को भी अनुदान दिया गया। इनमें शामिल हैं:
विकी विद्या का वह वाला वीडियो, लाइफ हिल गई (वेब सीरीज), Tanvi the Great, माली, मैं लड़ेगा, 5th सितम्बर, केसरी चैप्टर-2, ढाई आखर प्रेम का, गंगा संग रविदास, ए वेडिंग स्टोरी, Middle Class Love।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में फिल्म निर्माण बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं और उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिल रही है।




