सीएम हेल्पलाइन पर फर्जी निस्तारण बर्दाश्त नहीं, डीएम देहरादून ने जारी किया नोटिस

October 1, 2026 3:56 AM

दून हॉराइज़न, देहरादून (25 सितम्बर) : सरकारी दफ्तरों में कागजी आंकड़ों का खेल खेलकर जनता की शिकायतों को रफा-दफा करने वाले अधिकारियों पर अब शिकंजा कसने लगा है। विकासखंड डोईवाला के रेशम माजरी में सड़क मरम्मत को लेकर दर्ज एक शिकायत में खेल तब खुला जब प्रशासनिक टीम खुद मौके पर जांच करने पहुंच गई।

कागजों में तो समस्या सुलझा दी गई थी, लेकिन धरातल पर हालात जस के तस बने हुए थे। इसी को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने न सिर्फ गहरी नाराजगी जताई, बल्कि लापरवाह अफसरों को कारण बताओ नोटिस भी थमा दिया है।

रेशम माजरी में खुली दावों की पोल, मरम्मत के कुछ माह बाद ही उखड़ी सड़क

डोईवाला ब्लॉक के वार्ड संख्या 9, रेशम माजरी के ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline 1905) पर सड़क के जानलेवा गड्ढों को लेकर गुहार लगाई थी। विभागीय रिकॉर्ड्स की मानें तो कुछ ही महीने पहले यहां डामरीकरण और पैचवर्क का काम कराया गया था।

हैरानी की बात यह रही कि मौके पर पहुंची जांच टीम को सड़क पर फिर से गहरे गड्ढे नजर आए। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता मानकों के विपरीत मिली। ग्रामीणों का कहना था कि पहली ही मानसूनी बारिश में यहां जलभराव हो जाएगा, जिससे पैदल चलना भी दूभर रहेगा। बावजूद इसके, संबंधित विभाग के कर्मचारियों ने पोर्टल पर शिकायत को हल दिखाकर बंद कर दिया था।

अधीक्षण अभियंता करेंगे तकनीकी जांच, लापरवाही पर गिरेगी गाज

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीक्षण अभियंता को निर्माण कार्य और सड़क की मौजूदा स्थिति की विस्तृत तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं।

“सीएम हेल्पलाइन का मतलब केवल पोर्टल पर फाइलों को निपटाना नहीं है। जब तक नागरिक की समस्या का वास्तविक समाधान न हो और वह संतुष्ट न दिखे, तब तक शिकायत को बंद नहीं माना जाएगा।” (डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी, देहरादून)

जिले में अब बंद की जा चुकी अन्य पुरानी शिकायतों का भी औचक स्थलीय सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि झूठी आख्या लगाने वाले कार्मिकों को चिह्नित कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सके।

‘फोर्स क्लोज’ कल्चर पर शासन का कड़ा प्रहार

अक्सर देखा जाता है कि विभाग अपनी रैंकिंग सुधारने की होड़ में समस्याओं का सतही समाधान किए बिना ही शिकायतों को ‘फोर्स क्लोज’ (Force Close) श्रेणी में डाल देते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जनसमस्याओं के निस्तारण में झूठी रिपोर्टिंग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी। देहरादून प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम अन्य लापरवाह अफसरों के लिए भी एक सीधा संदेश है कि अब कंप्यूटर स्क्रीन के पीछे छिपकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।

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