देहरादून में बुधवार को हुई धामी कैबिनेट की बैठक कई मायनों में बेहद अहम रही। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में जनहित, शिक्षा, कर्मचारी कल्याण, कृषि और चारधाम यात्रा से जुड़े कुल 19 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद मुख्यमंत्री के अपर सचिव बंशीधर तिवारी ने फैसलों का ब्यौरा देते हुए कहा कि सरकार का फोकस विकास के साथ-साथ हर वर्ग को राहत पहुंचाने पर है।

कैबिनेट ने उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा नियमावली-2026 में संशोधन को मंजूरी देकर पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। वहीं, 98 फीसदी साक्षरता दर हासिल करने के बाद उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा देने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी मिल गई, जो प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
उपनल कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए समान कार्य-समान वेतन का लाभ पाने की समयसीमा को 15 अक्टूबर 2024 तक बढ़ा दिया गया है। दूसरी ओर, उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण को मंजूरी देकर सरकार ने आंदोलनकारियों के सम्मान का संदेश भी दिया है।

चारधाम यात्रा से जुड़े घोड़ा-खच्चर संचालकों के हितों का ध्यान रखते हुए सरकार ने करीब 15 हजार घोड़ा-खच्चरों के बीमा प्रीमियम का 20 प्रतिशत हिस्सा खुद वहन करने का फैसला किया है। इसके लिए एक करोड़ पांच लाख रुपये की व्यवस्था की जाएगी।
इसके अलावा बिटुमिन की संशोधित दरों को मंजूरी, कृषि विभाग के एरोमेटिक प्लांट सेंटर के सुदृढ़ीकरण के लिए पांच विशेषज्ञों की टीम का गठन, कारागार विभाग की नई नियमावली और पायलट परियोजना से जुड़े प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई।
धामी कैबिनेट के ये 19 फैसले सिर्फ सरकारी औपचारिकताएं नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए सरकार ने साफ कर दिया है कि उसका एजेंडा विकास, सुशासन और जनहित को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने का है। अब प्रदेशवासियों की नजर इन फैसलों के धरातल पर उतरने पर टिकी है।




