देहरादून :- उत्तराखंड में महिला स्वयं सहायता समूहों का नेटवर्क तेजी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में 5,19,943 महिलाएं संगठित होकर आजीविका गतिविधियों से जुड़ चुकी हैं और इनमें से 3,03,696 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत प्रदेश के 13 जिलों और 95 विकासखंडों में 70,767 स्वयं सहायता समूह, 8,179 ग्राम संगठन और 615 क्लस्टर लेवल फेडरेशन गठित किए गए हैं।
महिलाओं को जैविक खेती, फूड प्रोसेसिंग, डेयरी, हस्तशिल्प, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और पर्यटन आधारित गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार ने उत्पादों की ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन के लिए विशेष तंत्र विकसित किया है।
‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के जरिए महिला समूहों के उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंच मिल रही है। इसके अलावा सरस मेले और ग्रोथ सेंटर स्थानीय उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा दे रहे हैं।
महिला सशक्तिकरण को गति देने के लिए सरकार ने 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण, सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण, मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना, ड्रोन दीदी योजना, सोलर सखी योजना और अन्य आजीविका योजनाओं को भी आगे बढ़ाया है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2026-27 में 1.12 लाख और महिलाओं को लखपति दीदी बनाकर ग्रामीण उत्तराखंड में महिला नेतृत्व वाली आर्थिक प्रगति को नई ऊंचाई देना है।




