देवीधुरा की धरती पर जीवंत हुई सदियों पुरानी बग्वाल की परंपरा, 8 मिनट तक चला ऐतिहासिक आयोजन

August 28, 2026 5:58 PM

चम्पावत। मां वाराही धाम देवीधुरा एक बार फिर सदियों पुरानी ऐतिहासिक बग्वाल का साक्षी बना। रक्षाबंधन के अवसर पर चार खाम और सात थोक के बीच खेली गई बग्वाल में इस बार भी फल और फूलों का प्रयोग किया गया। दोपहर 1:48 बजे शुरू हुई बग्वाल 1:55 बजे तक चली, यानी करीब आठ मिनट तक मैदान में परंपरा और आस्था का अनूठा दृश्य देखने को मिला।

बग्वाल से पहले मां वाराही मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की गई। प्रधान पुजारी के पूजन के बाद चारों खामों के बग्वालियों ने पारंपरिक तरीके से मैदान में प्रवेश किया। वालिक खाम सफेद, चम्याल गुलाबी, गहड़वाल भगवा और लमगड़िया पीले रंग की पारंपरिक वेशभूषा में मैदान में उतरे। बग्वालियों के हाथों में बांस और रिंगाल से तैयार ढालें थीं।


शंखनाद के साथ जैसे ही बग्वाल शुरू हुई, पूरा मैदान मां वाराही के जयकारों से गूंज उठा। चारों ओर फल और फूल बरसते नजर आए। सदियों पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवीधुरा पहुंचे। पीठाचार्य पंडित कीर्तिबल्लभ जोशी के अनुसार फल-फूलों से खेली जाने वाली बग्वाल को शुभ और फलदायी माना जाता है।


मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी बने बग्वाल के साक्षी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हेलीकॉप्टर से देवीधुरा पहुंचे और मां वाराही के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवीधुरा की बग्वाल उत्तराखंड की अगाध आस्था, समृद्ध लोक संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता की अनूठी मिसाल है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक विकास के साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक धरोहरों को भी संरक्षित कर रही है। इसी कड़ी में ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ के तहत देवीधुरा समेत कुमाऊं के विभिन्न धार्मिक स्थलों में विकास कार्य किए जा रहे हैं।


उन्होंने बताया कि देवीधुरा मंदिर परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से गढ़वाल खाम भवन और रणकोची मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा घटोत्कच मंदिर के सौंदर्यीकरण, घटकु हिडिंबा मंदिर, सप्तेश्वर महादेव मंदिर के स्नानघाट और लधौनधुरा मेला स्थल के सौंदर्यीकरण जैसे कार्य भी किए गए हैं।


देवीधुरा को नगर पंचायत बनाने की बात
मुख्यमंत्री ने देवीधुरा को नगर पंचायत क्षेत्र बनाने की बात कही। उन्होंने देवीधुरा में 9.80 करोड़ रुपये की लागत से मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण शीघ्र कराने की बात भी कही। साथ ही बग्वाल मेले को राजकीय मेला घोषित किए जाने को महत्वपूर्ण कदम बताया।


मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के माध्यम से स्थानीय लोगों की आर्थिकी मजबूत करने, रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर सरकार का विशेष जोर है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के विकास की दिशा में ‘विकास भी और विरासत भी’ का संकल्प आगे बढ़ाया जा रहा है।


बग्वाल के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि मां वाराही की यह अनूठी विरासत केवल देवीधुरा के बग्वाल मैदान में देखने को मिलती है। उन्होंने इसे अनुशासन और भाईचारे की मिसाल बताया, जहां बग्वाल के बाद सभी योद्धा एक-दूसरे से गले मिलते हैं।


कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद अजय टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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