भूकंप से आग तक, हर खतरे के लिए तैयार होंगे उत्तराखंड के स्कूल

September 11, 2026 12:20 PM

देहरादून। उत्तराखंड के स्कूल अब आपदा आने का इंतजार नहीं करेंगे, बल्कि उससे निपटने के लिए पहले से तैयार रहेंगे। राज्य के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों का विस्तृत आपदा प्रबंधन प्लान तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक के निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग और उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ विद्यालयों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। तय किया गया कि हर स्कूल के लिए उसकी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अलग आपदा प्रबंधन योजना तैयार होगी।

प्लान में स्कूल के आसपास मौजूद संभावित आपदा जोखिमों को सबसे पहले चिन्हित किया जाएगा। इसमें भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, फ्लैश फ्लड, बादल फटना, अतिवृष्टि, हिमपात, हिमस्खलन और आग जैसी घटनाओं को शामिल किया जाएगा। जोखिम के आकलन के बाद सुरक्षित निकासी मार्ग, सुरक्षित स्थान और आपदा के समय अपनाई जाने वाली कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

किसी भी आपदा के दौरान अफरा-तफरी न हो, इसके लिए स्कूल स्तर पर जिम्मेदारियां भी पहले से तय होंगी। प्रधानाचार्य, शिक्षक और अन्य स्टाफ के साथ जरूरत के मुताबिक विद्यार्थियों को भी अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाएंगी। हर कक्षा और भवन के लिए निकासी व्यवस्था तय करने के साथ विद्यालय परिसर में सुरक्षित एकत्रीकरण स्थल बनाया जाएगा।

स्कूलों में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था मजबूत करने के साथ फर्स्ट एड किट और जरूरी राहत एवं बचाव सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। पुलिस, फायर, स्वास्थ्य विभाग, जिला एवं राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, तहसील प्रशासन और अन्य जरूरी विभागों के आपातकालीन नंबर स्कूल में प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाएंगे।

विद्यालयों में नियमित मॉक ड्रिल भी आयोजित की जाएगी। विद्यार्थियों और शिक्षकों को भूकंप, आग, भूस्खलन और अन्य आपदाओं के दौरान सुरक्षित रहने की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वास्तविक आपदा के समय प्रतिक्रिया तेज और प्रभावी हो सके।

दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए भी आपदा प्रबंधन प्लान में अलग से व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही स्कूल भवन, बिजली व्यवस्था, गैस और रसोई, पानी की टंकियों, प्रयोगशालाओं और खेल मैदान समेत सभी महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा जांच की जाएगी।

आपदा के समय बच्चों की होगी अहम भूमिका
स्कूलों में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए छह विशेष टीमों का गठन किया जाएगा। इनमें चेतावनी एवं सूचना, निकासी, प्राथमिक उपचार, अग्नि सुरक्षा, खोज एवं बचाव और सहायता एवं मनोसामाजिक टीम शामिल हैं।

इन टीमों की खासियत यह होगी कि इनका नेतृत्व बच्चे करेंगे। हालांकि शिक्षकों और स्कूल स्टाफ की भूमिका मार्गदर्शक और सहयोगी की रहेगी। बच्चों की उम्र और क्षमता के अनुसार उन्हें जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे वे आपदा के समय केवल मदद लेने वाले नहीं, बल्कि सुरक्षित और जिम्मेदार प्रतिक्रिया देने में सक्षम बन सकें।

विद्यालय और अभिभावकों के बीच आपदा के समय संचार व्यवस्था विकसित करने के साथ स्थानीय प्रशासन, ग्राम पंचायत और स्थानीय समुदाय को भी जरूरत के अनुसार इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए शिक्षा विभाग और यूएसडीएमए के स्तर पर समिति गठित करने की तैयारी है।

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