देहरादून :- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ के दूसरे चरण की शुरुआत करते हुए प्रदेश की 488 महिलाओं को DBT के माध्यम से 2.76 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य महिलाओं को सहायता का पात्र बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सक्षम बनाना है।


कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के कमजोर वर्ग की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। योजना के माध्यम से एकल, विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा महिलाओं, एसिड अटैक पीड़िताओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को केवल अनुदान नहीं दे रही, बल्कि उन्हें स्थायी आजीविका और आत्मविश्वास प्रदान करने का प्रयास कर रही है।



मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। राज्य सरकार 15 हजार से अधिक महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदियों को इन्क्यूबेशन सुविधा उपलब्ध करा रही है। वहीं ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड के जरिए महिलाओं द्वारा तैयार स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का भी प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया है और समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर महिलाओं के अधिकारों को और मजबूत किया है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना आने वाले समय में प्रदेश की हजारों महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मनिर्भरता, सम्मान और स्वाभिमान का नया अध्याय लिखेगी।

महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि यह योजना प्रदेश की एकल महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। उन्होंने लाभार्थी महिलाओं से इस अवसर का पूरा लाभ उठाने और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनने का आह्वान किया।




