देहरादून: शिक्षा निदेशालय में हंगामा, विधायक पर मारपीट के आरोप से सियासत गरम

February 21, 2026 12:01 PM

राजधानी देहरादून स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ पर निदेशक अजय कुमार नौडियाल के साथ मारपीट के गंभीर आरोप लगे। घटना के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें निदेशक के कक्ष में तीखी बहस, धक्का-मुक्की और कुर्सियां फेंके जाने जैसे दृश्य दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ गया है।

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स्कूल के नाम परिवर्तन से शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के नाम परिवर्तन को लेकर विवाद की शुरुआत हुई। विधायक अपने समर्थकों के साथ निदेशालय पहुंचे और संबंधित विद्यालय का नाम बदलने की मांग रखी।

निदेशक ने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी स्कूल का नाम परिवर्तन शासन स्तर पर तय होता है और यह निर्णय उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसी बात को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया।

धक्का-मुक्की और हंगामे के आरोप
आरोप है कि विधायक और उनके साथ पहुंचे कुछ कार्यकर्ताओं ने निदेशक पर दबाव बनाने की कोशिश की। बहस बढ़ते-बढ़ते कथित धक्का-मुक्की और मारपीट तक पहुंच गई। सामने आए वीडियो में कई लोग निदेशक कक्ष में मौजूद दिख रहे हैं और हंगामे के दौरान कुर्सी फेंके जाने जैसी घटनाएं भी कैद हुई हैं।

पुलिस तैनात, शिक्षकों में आक्रोश
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और निदेशालय परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई। अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

इस घटना के बाद शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षकों में गहरा आक्रोश है। शिक्षकों का कहना है कि यदि किसी मुद्दे पर असहमति थी, तो उसे शासन स्तर पर उठाया जाना चाहिए था। उन्होंने विधायक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

सड़क पर उतरे शिक्षक
कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर बड़ी संख्या में शिक्षक सड़क पर उतर आए। निदेशालय के बाहर धरना दिया गया और कुछ समय के लिए सड़क जाम भी किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा। शिक्षकों ने इसे शिक्षा तंत्र की गरिमा से जुड़ा मामला बताया है।

राजनीतिक रंग और जांच की बात
विधायक पक्ष की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। समर्थकों का कहना है कि विधायक जनभावनाओं के अनुरूप मांग रखने पहुंचे थे और आरोप एकतरफा हैं।

वहीं विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। प्रशासनिक स्तर पर पूरे घटनाक्रम की जांच की बात कही जा रही है।

देहरादून की इस घटना ने प्रशासन, राजनीति और शिक्षा तंत्र के बीच समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और क्या शिक्षकों का आंदोलन थमता है या नहीं।

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