देहरादून: उत्तराखंड में अब अवैध निर्माण और अनियमित कॉलोनियों पर लगाम कसने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार निर्माण क्षेत्र को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को रेरा पोर्टल से जोड़ने जा रही है। इस फैसले से जहां पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और समयबद्ध होगी, वहीं भ्रष्टाचार की संभावनाओं पर भी अंकुश लगने की उम्मीद है।
सचिवालय में आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब नियोजित क्षेत्रों के बाहर स्थित परियोजनाओं की मानचित्र स्वीकृति भी रेरा पोर्टल के जरिए होगी और सभी संबंधित प्राधिकरणों को इस सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा, जिन्हें अब नक्शा पास कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
बैठक में भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क को लेकर भी बड़ा संकेत मिला है। हाल ही में बढ़ाए गए शुल्क से आम लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए सरकार ने इस पर पुनर्विचार के निर्देश दिए हैं। सभी विकास प्राधिकरणों से एक हफ्ते के भीतर संशोधित प्रस्ताव मांगे गए हैं, ताकि जनहित में राहत दी जा सके।
वहीं, एक अहम फैसले में अब अधिसूचित क्षेत्रों में पंचायतों का नक्शा पास करने का अधिकार खत्म कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत केवल विकास प्राधिकरण ही इन क्षेत्रों में मानचित्र स्वीकृति देंगे, जिससे प्रक्रिया में एकरूपता और स्पष्टता आएगी।
सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि अब अधिसूचित क्षेत्रों के बाहर भी अगर कोई कॉलोनी विकसित की जाती है या जमीन का उपविभाजन होता है, तो उस पर रेरा के जरिए कड़ी निगरानी रखी जाएगी। इसके लिए प्राधिकरणों और रेरा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी रोक लग सके।
बढ़ते अवैध निर्माण को लेकर भी सरकार सख्त नजर आ रही है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक कॉमन ड्राफ्ट तैयार किया जाए, जिससे सभी प्राधिकरण एक समान कानूनी ढांचे के तहत तेज और प्रभावी कार्रवाई कर सकें।
कुल मिलाकर, सरकार का फोकस साफ है, निर्माण क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्ती। आने वाले समय में इन फैसलों का सीधा असर आम लोगों और रियल एस्टेट सेक्टर दोनों पर देखने को मिलेगा।

