उत्तरकाशी: उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दयारा बुग्याल में लापता हुई महिला ट्रेकर बबीता पांडे का कई दिनों बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। लगातार चल रहे व्यापक सर्च ऑपरेशन के बावजूद पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम), वन विभाग और राजस्व विभाग की टीमों को अब तक सफलता नहीं मिली है। इस रहस्यमयी गुमशुदगी ने न केवल प्रशासन बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों को भी चिंता में डाल दिया है।

महिला की तलाश में आधुनिक तकनीकों का भी भरपूर इस्तेमाल किया गया। ड्रोन कैमरों से दुर्गम क्षेत्रों की निगरानी की गई, स्वान दल को लगाया गया और यूकाडा के हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण भी कराया गया। इसके बावजूद दयारा बुग्याल के जंगलों, गहरी खाइयों, गदेरों और दूरस्थ पहाड़ी इलाकों में बबीता पांडे का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।

जैसे-जैसे समय बीत रहा है, इस घटना को लेकर लोगों के बीच रहस्य और जिज्ञासा बढ़ती जा रही है। स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। कुछ ग्रामीण इसे क्षेत्र की पुरानी लोककथाओं और मान्यताओं से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि प्रशासन लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और तथ्यों पर भरोसा रखने की अपील कर रहा है।

इस बीच, दयारा बुग्याल जैसे विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल से जुड़ी इस घटना ने पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। उनका मानना है कि यदि इस तरह की अफवाहें और अंधविश्वास फैलते रहे तो इसका असर क्षेत्र की पर्यटन छवि पर पड़ सकता है।

फिलहाल पुलिस और बचाव एजेंसियां पूरी गंभीरता के साथ सर्च ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि जब तक बबीता पांडे का पता नहीं चल जाता, तब तक खोज अभियान जारी रहेगा। लेकिन कई दिनों की लगातार तलाश के बाद भी कोई सुराग न मिलना इस पूरे मामले को और अधिक रहस्यमयी बना रहा है।




