टनकपुर :- सीमांत जनपद चंपावत का टनकपुर नगर एक बार फिर कैलाश मानसरोवर यात्रा के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष प्रयासों से लगातार दूसरी बार कैलाश मानसरोवर यात्रा का मार्ग टनकपुर से होकर तय किया गया है। यात्रा को लेकर प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और 4 जुलाई की शाम कैलाश यात्रियों का पहला जत्था टनकपुर पहुंचेगा। इसके अगले दिन 5 जुलाई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं टनकपुर पहुंचकर टूरिस्ट रेस्ट हाउस (टीआरसी) परिसर से यात्रियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।


कैलाश यात्रियों के स्वागत को लेकर पूरे टनकपुर क्षेत्र में उत्साह का वातावरण है। टीआरसी प्रबंधक मनोज कुमार के अनुसार, मुख्यमंत्री के प्रस्तावित दौरे और यात्रियों के स्वागत को देखते हुए टीआरसी परिसर को विशेष रूप से सजाया जा रहा है। परिसर में आकर्षक सजावट के साथ-साथ आवास, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि कैलाश यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा का दायरा भी बढ़ाया गया है। जहां पिछले वर्ष पांच दलों के माध्यम से यात्रा संचालित हुई थी, वहीं इस वर्ष दस दलों में लगभग 500 श्रद्धालु टनकपुर पहुंचेंगे। प्रत्येक दल में लगभग 50 श्रद्धालु शामिल होंगे। यात्रियों की बढ़ी हुई संख्या से स्थानीय पर्यटन उद्योग, होटल व्यवसाय, परिवहन और छोटे व्यापारियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) यात्रा के सफल संचालन के लिए सभी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। इसके अलावा जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां सुरक्षा व्यवस्था और यात्री सुविधाओं को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं। स्थानीय लोग, व्यापारी संगठन और सामाजिक संस्थाएं भी कैलाश यात्रियों के भव्य स्वागत की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रयासों से लगातार दूसरी बार टनकपुर को कैलाश मानसरोवर यात्रा का प्रमुख पड़ाव बनाया जाना सीमांत क्षेत्र के विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी। कैलाश मानसरोवर यात्रा के बहाने टनकपुर और चंपावत जनपद को देश और दुनिया में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।




