देहरादून : उत्तराखण्ड सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह नई व्यवस्था राज्य के सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को समान अवसर प्रदान करने और उन्हें आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।


मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र प्रदान किए और विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की पुस्तकें भेंट कीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को सशक्त, आत्मनिर्भर और जागरूक बनाने का सबसे प्रभावी साधन है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डिजिटल तकनीक और कौशल विकास का युग है। ऐसे में राज्य का कोई भी बच्चा आधुनिक शिक्षा और तकनीक से वंचित न रहे, इसके लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में आस्था और आधुनिकता के बीच संतुलन स्थापित करते हुए विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले की व्यवस्थाओं में जिन वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया, उन्हें अब शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप उत्तराखण्ड में शिक्षा को कौशल, नवाचार, अनुसंधान और रोजगार से जोड़ा जा रहा है।


उन्होंने कहा कि राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण केवल मान्यता प्रदान करने वाली संस्था नहीं होगा, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण, पारदर्शिता और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन का एक मजबूत मंच बनेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल उत्तराखण्ड को शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




